हेलो फ्रेंड्स वेलकम ल. के सैनी वेबसइट नाउ हम लर्न इन कंप्यूटर मेमोरी इन हिंदी नाउ स्टाwhat is computer memory in hindi र्टेड फ्रॉम मनोरी
Memory (मेमोरी)
कंप्यूटर में मेमोरी एक महत्वपूर्ण कोम्पेंट होता है जो कंप्यूटर डाटा को प्रमामेंटली स्टोर होता है यह वर्क ओनली दो ही डिटिग्स में होता है ह Device Input Device के द्वारा प्राप्त निर्देशों को Computer में संग्रहण (Store) करके रखता है इसे Computer की याददाश्त भी कहाँ जाता है| मानव में कुछ बातों को याद रखने के लिये मष्तिस्क होता है, उसी प्रकार Computer में डाटा को याद रखने के लिए मेमोरी (Memory) होती हैं| यह मेमोरी C.P.U का अभिन्न अंग है,इसे Computer की मुख्य मेमोरी (Main memory), आंतरिक मेमोरी (Internal Memory), या प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं
कंप्यूटरो में एक से अधिक मेमोरी होती है हम उनको सामान्यतः प्राथमिक (Primary) व द्वितीयक (Secondary) मेमोरी के रूप में वर्गीकृत कर सकते है प्राथमिक मेमोरी अस्थिर (Volatile) तथा स्थिर (Non-Volatile) दोनों प्रकार कि होती है| अस्थिर मेमोरी (Temprery Memory) डेटा को अस्थाई रूप से कंप्यूटर ऑन होने से लेकर कंप्यूटर बंद होने तक ही रखते है अर्थात कंप्यूटर अचानक बंद होने या बिजली के जाने पर कंप्यूटर से डाटा नष्ट हो जाता है स्थिर मेमोरी (Permanent Memory) आपके कंप्यूटर को प्रारंभ करने में सहायक होती हैं| इसमें कुछ अत्यंत उपयोगी फर्मवेयर होते है जो कंप्यूटर को बूट करने में मदद करते है बूटिंग कंप्यूटर को शुरू करने कि प्रक्रिया को कहा जाता है इसे मुख्य मेमोरी कहा जाता हैं| द्वितीयक संग्रहण वह है जो हमारे डाटा को लंबे समय तक रखता है द्वितीयक संग्रहण कई रूपों में आते हैं| फ्लोपी डिस्क, हार्ड डिस्क, सी.डी. आदि |
बिट अथवा बाइट:- मेमोरी में स्टोर किया गया डाटा 0 या 1 के रूप में परिवर्तित हो जाता है 0 तथा 1 को संयुक्त रूप से बाइनरी डिजिट कहा जाता हैं| संक्षेप में इन्हें बिट भी कहा जाता हैं| यह बिट कंप्यूटर कि मेमोरी में घेरे गे स्थान को मापने की सबसे छोटी इकाई होती हैं|
8 Bits = 1 Bytes
1024 Bytes = 1 Kilobyte (1 KB)
1024 KB = 1 Megabyte (1MB)
1024 MB = 1 Gigabyte (1 GB)
1024 GB = 1 Terabyte (1 TB)
मेमोरी दो प्रकार की होती हैं|
- प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory)
- सेकंडरी मेमोरी (Secondary Memory)
Primary Memory:-Memory कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है जहाँ डाटा, सूचना, एवं प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहते है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपलब्ध रहते है यह मेमोरी अस्थिर मेमोरी होती है क्योकि इसमें लिखा हुआ डाटा कंप्यूटर बंद होने या बिजली के जाने पर मिट जाता है प्राइमरी मेमोरी कहलाती हैं| इसे प्राथमिक मेमोरी या मुख्य मेमोरी भी कहते हैं|
प्राइमरी मेमोरी मुख्यतः दो प्रकार की होती है –
रैम (RAM)
रोम (ROM)
RAM (Random Access Memory):-
RAM या Random Access Memory कंप्यूटर की अस्थाई मेमोरी (Temprery Memory) होती हैं| की-बोर्ड या अन्य किसी इनपुट डिवाइस से इनपुट किया गया डाटा प्रक्रिया से पहले रैम में ही संगृहीत किया जाता है और सी.पी.यू. द्वारा आवश्यकतानुसार वहाँ से प्राप्त किया जाता है रैम में डाटा या प्रोग्राम अस्थाई रूप से संगृहीत रहता है कंप्यूटर बंद हो जाने या विजली चले जाने पर रैम में संगृहीत (Store) डाटा मिट जाता हैं| इसलिए रैम को Volatile या अस्थाई मेमोरी कहते है रैम की क्षमता या आकार कई प्रकार के होते है जैसे कि- 4 MB, 8 MB, 16 MB, 32 MB, 64 MB, 128 MB, 256 MB आदि | रैम तीन प्रकार कि होती हैं|
- Dynamic RAM
- Synchronous RAM
- Static RAM
- Dynamic RAM:- Dynamic RAM को संक्षिप्त में डीरैम (DRAM) कहा जाता हैं| रैम (RAM) में सबसे अधिक साधारण डीरैम (DRAM) है तथा इसे जल्दी जल्दी रिफ्रेश (Refresh) करने कि आवश्यकता पड़ती हैं| रिफ्रेश का अर्थ यहाँ पर चिप को विधुत अवशेषी करना होता है यह एक सेकंड में लगभग हजारों बार रिफ्रेश होता है तथा प्रत्येक बार रिफ्रेश होने के कारण यह पहले कि विषय वस्तु को मिटा देती है इसके जल्दी जल्दी रिफ्रेश होने के कारण इसकी गति (Speed) कम होती हैं|
- Synchronous RAM:- Synchronous RAM डीरैम(DRAM) कि अपेक्षा ज्यादा तेज हैं| इसकी तेज गति का कारण यह है कि यह सी.पी.यू. की घडी कि गति के अनुसार Refresh होती हैं| इसीलिए ये डीरैम कि अपेक्षा डाटा (Data) को तेजी से स्थानांतरित (Transfer) करता हैं|
- Static RAM:- Static RAM ऐसी रैम है जो कम रिफ्रेश होती हैं| कम रिफ्रेश (Refresh) होने के कारण यह डाटा को मेमोरी में अधिक समय तक रखता हैं| डीरैम की अपेक्षा एस-रैम तेज तथा महँगी होती हैं|
ROM (Read only memory):- रोम का पूरा नाम रीड ऑनली मेमोरी होता हैं| यह स्थाई मेमोरी (Permanent memory) होती है जिसमे कंप्यूटर के निर्माण के समय प्रोग्राम Store कर दिये जाते हैं| इस मेमोरी में Store प्रोग्राम परिवर्तित और नष्ट नहीं किये जा सकते है, उन्हें केवल पढ़ा जा सकता हैं| इसलिए यह मेमोरी रीड ऑनली मेमोरी कहलाती हैं| कंप्यूटर का स्विच ऑफ होने के बाद भी रोम में संग्रहित डाटा नष्ट नहीं होता हैं| अतः रोम नॉन-वोलेटाइल या स्थाई मेमोरी कहलाती हैं| रोम के विभिन्न प्रकार होते है जो निम्नलिखित है –
- PROM (Programmable Read Only Memory)
- EPROM (Erasable Programmable Read Only Memory)
- EEPROM (Electrical Programmable Read Only Memory)
- PROM:- PROM का पूरा नाम Programmable Read Only Memory होता है यह एक ऐसी मेमोरी है इसमें एक बार डाटा संग्रहित (Store) होने के बाद इन्हें मिटाया नहीं जा सकता और न ही परिवर्तन (Change) किया जा सकता हैं|
- EPROM:- EPROM का पूरा नाम Erasable Programmable Read Only Memory होता है यह प्रोम (PROM) की तरह ही होता है लेकिन इसमें संग्रहित प्रोग्राम (Store Program) को पराबैगनी किरणों (Ultraviolet rays) के द्वारा ही मिटाया जा सकता है और नए प्रोग्राम संग्रहित (Store) किये जा सकते हैं|
- EEPROM:- EEPROM का पूरा नाम Electrical Programmable Read Only Memory होता हैं| एक नई तकनीक इ-इप्रोम (EEPROM) भी है जिसमे मेमोरी से प्रोग्राम को विधुतीय विधि से मिटाया जा सकता हैं|
- सेकेंडरी मेमोरी व्हिच इस स्टोर डाटा परमानेंटली केंडरी मेमोरी (Secondary Memory) के नाम से ही पता चलता है कि यह कंप्यूटर की प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) से अलग होती है यानि यह आन्तरिक (Internal) भाग नहीं होती है, सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) को कंप्यूटर में अलग से जोडा जाता है इसे कंप्यूटर की द्वितीय मेमोरी (Secondary Memory) भी कहा जाता है तो आईये जानते हैं कंप्यूटर की सेकेंडरी मेमोरी क्या होती है
- मैग्नेटिक/चुम्बकीय टेप (Magnetic Tape)
- मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk)
- ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk)
- यूऍसबी फ्लैश ड्राइव (USB Flash Drive)
1- मैग्नेटिक/चुम्बकीय टेप (Magnetic Tape)
यह देखने में किसी पुराने जमाने के टेप रिकार्डर की कैसेट की तरह होती थी, इसमें प्लास्टिक के रिबन पर चुम्बकीय पदार्थ की परत चढी होती थी, जिस पर डाटा स्टोर करने के लिये हेड का प्रयोग किया जाता था बिलकुल टेप रिकार्डर की तरह, इस डाटा का कितनी बार लिखा और मिटाया जा सकता था और यह काफी सस्ते होते थे
2- मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk)
मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk) दो प्रकार की होती हैं -
- फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)
- हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive)
फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)
फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) के बहुत पतले प्लास्टिक की एक गोल डिस्क होती है जो एक प्लास्टिक के कवर में बंद रहती थी, इस डिस्क पर चुम्बकीय पदार्थ की परत चढी होती थी, फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) आकार एवं और स्टोरेज के आधार पर दो प्रकार की होती है -
- मिनी फ्लॉपी (Mini Floppy) - मिनी फ्लॉपी (Mini Floppy) का व्यास (Diameter) 3½ इंच होता है और इसकी स्टोरेज क्षमता 1.44 MB होती है इसे कंप्यूटर में रीड करने के लिये 3½ इंच के फ्लॉपी डिस्क रीडर (Floppy disk reader) की आवश्यकता होती है, यह लगभग 360 RPM यानि Revolutions Per Minute यानि चक्कर/घूर्णन प्रति मिनट की दर से घूमती है इसी प्रकार
- माइक्रो फ्लॉपी (Micro Floppy) - माइक्रो फ्लॉपी (Micro Floppy) का व्यास (Diameter) 5½ इंच होता है और इसकी स्टोरेज क्षमता 2.88 MB होती है, इसके भी 5½ इंच के फ्लॉपी डिस्क रीडर (Floppy disk reader) की आवश्यकता होती है
नोट - कंप्यूटर में "ए" और "बी" ड्राइव का इस्तेमाल फ्लॉपी डिस्क के लिये ही होता था और आज भी वर्तमान में "A" और "B" ड्राइव फ्लॉपी डिस्क के लिये ही Reserveरहती है, हालांकि इसका प्रयोग बिलकुल बंद हो चुका है
हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive)
आपको बता दें कि दुनिया की पहली हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) के निर्माता IBM हैं, जिसे 1980 में बनाया गया, यह एक यह एलुमिनियम धातु की डिस्क होती है जिस पर पदार्थ का लेप चढा रहता है, यह डिस्क एक धुरी पर बडी तेजी से घूमती है और इसकी गति को RPM यानि Revolutions Per Minute यानि चक्कर/घूर्णन प्रति मिनट में मापा जाता है, आजतक बाजार में 5200 RPM और 7200 RPM वाली हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) उपलब्ध है, हार्डडिस्क ड्राइव में Track और Sector में डाटा स्टोर होता है. एक सेक्टर में 512 बाईट डाटा स्टोर होता है, 80 के दशक में आयी हार्डडिस्क ड्राइव जिसके पहले पार्टीशन को नाम दिया गया "C" ड्राइव और आज जब आप विंडोज इंस्टॉल करते हो तो वह सबसे पहले "C" ड्राइव में ही इंस्टाॅल होती है। अगर स्टोरेज की बात करें ताे हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) को प्रमुख सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है वर्तमान में 1 टैराबाइट से लेकर 100 टैराबाइट तक की हार्ड डिस्क उपलब्ध हैं
3- ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk)
ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) में पॉली कार्बोनेट की गोल डिस्क होती है, जिस पर एक रासायनिक पदार्थ का लेप रहता है ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) डेटा डिजिटली रूप में सुरक्षित रहता है, डाटा को ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) पर रीड और राइट करने के लिये कम क्षमता वाले लेजर प्रकाश का प्रयोग किया जाता है ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) तीन प्रकार की होती है -
- सीडी (CD)
- डीवीडी ड्राइव (DVD)
- ब्लू रे (Blu Ray)
सीडी (CD )
सीडी (CD) का पूरा नाम कॉम्पेट डिस्क है, इसकी क्षमता हार्डडिस्क से कम और फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) से ज्यादा होती है, इसमें कुछ 700MB डाटा को स्टोर किया जा सकता है, इसमें डाटा लगभग 30 वर्षो तक सुरक्षित रह सकता है, लेकिन इसकी सतह पर स्क्रैच आने पर डाटा को रीड और राइट करने में परेशानी होती है
डीवीडी (DVD)
सीडी (CD) की अपेक्षा डीवीडी (DVD) यानी डिजिटल वर्सटाइल डिस्क की स्टोरेज क्षमता बहुत अधिक होती है, लेकिन देखने में यह दोनों एक जैसी ही लगती है डीवीडी (DVD)की स्टोरेज क्षमता करीब 4.7 जीबी से लेकर 17 जीबी तक होती है, लेकिन स्क्रेच वाली समस्या यहां भी है
ब्लू रे (Blu Ray)
ब्लू रे (Blu Ray) देखने में CD और DVD की तरह ही होती है लेकिन इसको रीड और राइट करने के लिये जिसे लेजर प्रकाश का प्रयोग किया जाता है वह नीले रंग-जैसी बैंगनी किरण होती है इसलिये इसे ब्लू रे (Blu Ray) कहा जाता है, इस प्रकाश की वजह से ब्लूरे डिस्क पर 50 जीबी तक डाटा स्टोर किया जाता सकता है
4- यूऍसबी फ्लैश ड्राइव (USB Flash Drive)
यह वर्तमान की सबसे पॉपुलर और पोर्टबल सेकेंडरी मेमोरी डिवाइस है जो USB पोर्ट के माध्यम से कंप्यूटर से जोड़ी जाती है जिसे हम पेन ड्राइव के नाम से भी पुकारते है, इसका प्रयोग वीडियो, ऑडियो के अलावा अन्य डेटा को सेव करने के लिए किया जाता है





